काेराेना लैब में हाईवाेल्टेज से मशीनें फुंकी, 234 सैंपल अटके

आज जांच के बाद हाेगा नुकसान का आंकलन, ठेकेदार की ओर से कराए गए काम में लापरवाही आई सामने, रात काे बिजली लाइनाें में हुई 440 वाेल्टेज की सप्लाई हाई वोल्टेज से जिला अस्पताल की कोविड लैब की मशीन और एसी फुंक गए, लेकिन आरटीपीसीआर मशीन बच गई। शनिवार रात करीब एक बजे कोरोना सैंपलों की जांच के दौरान लाइन में 440 वोल्टेज सप्लाई से मशीनें फुंक गई। नुकसान का आंकलन सोमवार को कंपनी के इंजीनियर करेंगे। फिलहाल मशीनों को बंद कर दिया है। अस्पताल प्रशासन प्रथम दृष्ट्या एनएचएम के ठेकेदार द्वारा कराए बिजली के काम में लापरवाही मान रहा है। जिससे हाई वोल्टेज पर भी एमसीबी नहीं गिरी और उपकरण फुंक गए। 20 दिन पहले शुरू हुई इस लैब में जिला अस्पताल, शहर की सारी डिस्पेंसरियाें और ग्रामीण क्षेत्र के किशनगढ़बास, मुंडावर और खेड़ली से आए करीब 500 कोरोना सैंपलों की लगातार जांच हो रही है। सीएचसी-पीएचसी और दो शहरी पीएचसी के करीब 700 से अधिक सैंपल जयपुर भेजे जा रहे हैं। मशीन फुंकने से लैब में अटके 234 सैंपल सोमवार को जांच के लिए अब जयपुर भेजे जाएंगे। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक कोविड लैब कें शनिवार रात सैंपलों की जांच का काम चल रहा था। करीब एक बजे बिजली लाइन में 440 वोल्टेज सप्लाई होने से मशीनों में शाॅर्ट सर्किट होने से तेज धुआं निकला। कर्मचारियों ने तुरंत बिजली लाइन की एमसीबी गिरा दी, जिससे आरटीपीसीआर मशीन बच गई, लेकिन उससे पहले सैंपलों के 3 स्टेप की जांच प्रक्रिया के प्रोसेस की मशीनें फुंक गई। सैंपलों की जांच कर रहे लैब टेक्नीशियनों ने सैंपलों को व्यवस्थित किया। लैब के नोडल अधिकारी, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, पीएमओ और लैब के स्टोर प्रभारी को सूचना दी गई। रविवार सुबह आरटीपीसीआर लैब कंपनी के इंजीनियर और एनएचएम के बिजली इंजीनियर को घटना की जानकारी दे दी गई। अस्पताल प्रशासन ने सुबह लैब में पहुंचकर जब बिजली लाइनों में सप्लाई की जांच कराई तो 440 वोल्टेज आ रहे थे। बाद में बिजली फिटिंग करने वाले ठेकेदार इलेक्ट्रीशियन, अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन और डिस्कॉम के इंजीनियरों ने पहुंचकर लाइनों की जांच की। फिलहाल ठेकेदार के इंजीनियरों ने लाइन को सुधारा है। यूआईटी के इंजीनियरों ने भी लाइनों की जांच की है। लेकिन अभी सभी मशीनों को बंद कर दिया गया है। यहां करीब 100 सैंपलों की जांच के 3 स्टेप पूरे होने पर अब कंपनी इंजीनियर आने के बाद आरटीपीसीआर मशीन से चौथे स्टेप में रीडिंग का कार्य पूरा किया जाएगा। जबकि करीब 150 सैंपलों की जांच मशीनें सही होने पर ही होंगी। बता दें कि जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं की निगरानी और देखभाल पीएमओ डॉ. सुनील चौहान, डॉ. मोहनलाल सिंधी, डॉ. राजीव गुप्ता और डिप्टी कंट्रोलर डॉ. सुशील बत्रा कर रहे है। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पहुंचे डिस्कॉम के इंजीनियरों के सामने लाइनों में सुधार के बाद वोल्टेज मापे गए तो 250 वोल्टेज की सप्लाई मिली जबकि आरटीपीसीआर लैब की सभी मशीनों पर 220 से 230 वोल्टेज पर संचालित करने के निर्देश लिखे हैं। डिस्कॉम इंजीनियरों का कहना था कि बिजली लाइनों में 250 वोल्टेज की सप्लाई ही रहती है। ऐसे हुई 440 वोल्टेज की सप्लाई: अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कोविड लैब की बिजली लाइन में सप्लाई के दौरान न्यूट्रल लाइन शार्ट हो गई और इसके जलने के बाद एमसीबी नहीं गिरी और उससे डबल फेस सप्लाई हो गए। दोनों लाइनें मिलने के बाद डबल फेस से 440 वोल्ट की सप्लाई हो गई, जिससे मशीनें फुंकी हैं। इसमें न्यूट्रल वायर बेहद कमजोर बताया गया है। ^कोरोना लैब की बिजली लाइन में न्यूट्रल के जलने पर एमसीबी नहीं गिरी और हाई वोल्टेज से कई उपकरण जल गए हैं। इसमें प्रथम दृष्ट्या एमएचएम के ठेकेदार की लापरवाही सामने आई है, जिसने बिजली फिटिंग में कमजोर वायर लगाए। मशीन की कंपनी के इंजीनियर और एनएचएम के इंजीनियर को सूचना दे दी है, वे सोमवार को जांच कर नुकसान का आंकलन करेंगे। तब तक सभी मशीन बंद कर दी हैं। अटक गए सैंपल जांच के लिए अब जयपुर भेजे जाएंगे। -डॉ. मोहनलाल सिंधी, कार्यवाहक पीएमओ ^लैब की लाइन में न्यूट्रल वायर कम कैपेसिटी का लगाया हुआ था। उसके जलने पर डबल लाइन से 440 वोल्ट की सप्लाई शुरू हो गई। इससे उपकरण जले हैं। डिस्कॉम की लाइन में बिलकुल सही वोल्टेज हैं। इंजीनियरों ने खुद जाकर लाइनों चैक की है। लाइनों में 250 वोल्टेज से कोई नुकसान नहीं होता है। -बीएल सैनी, एक्सईएन, डिस्काॅम ​​​​​​​लापरवाही : बिना फायर सेफ्टी उपकरण लैब में शुरू कर दी जांच लैब में हाई वोल्टेज से उपकरण जलने की घटना में अस्पताल प्रशासन की फायर सेफ्टी को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। लैब में 21 जुलाई को कोरोना सैंपलों की जांच तो शुरू कर दी गई, लेकिन यहां फायर सेफ्टी के उपकरण अभी तक नहीं लगाए हैं। शनिवार को हाई वोल्टेज से मशीनों में शार्ट सर्किट के बाद अगर आग लग जाती तो फायर सेफ्टी के उपकरण ही उपलब्ध नहीं थे। कोविड लैब में जले 10 तरह के 15 उपकरण जिला अस्पताल की इस लैब में हाई वोल्टेज के कारण 2 एलनप्रो फ्रीज, 1 बायोसेफ्टी केबिनेट विद वायरस वर्न यूनिट, 1 थर्मो साइंटीफिक रेफ्रिजरेटेड सेंट्रीफ्यूज मशीन, 1 रेमी सेंट्रीफ्यूज मशीन, 2 एयर कंडीशनर, 2 स्टेबलाइजर, 2 यूपीएस,1 सीसीटीवी सेटअप, 1 इंटरकॉम सेटअप और 2 यूपीएस बायोरेड खराब हुए हैं।

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